कटिहार – पत्थर दिल माँ ने नवजात बच्चे की परवरिश के लिए ..ममता का किया त्याग ..

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पत्थर दिल माँ ने नवजात बच्चे की परवरिश के लिए ..ममता का किया त्याग ..

कटिहार से रतन कुमार की रिपोर्ट

बिहार के कटिहार में ..एक माँ को ..हालात ने इस कदर किया मजबूर कि..नवजात को प्रसव के कुछ देर बाद..अस्पताल के पालना में छोड़ आयी ..अकेला मासूम को देख ..चिकित्सक ने चाइल्ड लाइन को बुलाकर किया सुपुर्द.. मामला फलका प्रखंड क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र का ..

कलेजे की कठोर माँ से जब सवाल पूछा  .. क्या माँ ऐसी भी होती है ..!

दो मासूम बच्चो की माँ पुनिया ने कहा – गरीबी और लाचारी ने हालत से करा डाला है समझौता ..पड़ोसी महिला ने कहा –  गरीबी इस माँ के लिए बनी है मुसीबत .. जिस वजह से पत्थर दिल माँ ने बच्चे की परवरिश के लिए ..ममता का किया है त्याग ..

चिकित्सक ने कहा – लिखित सूचना एक माँ ने प्रसव के बाद अस्पताल को दिया है कि- अपने कलेजे के टुकड़े को पालने में है असमर्थ…क्या मां की ममता से बड़ी पेट की भूख भी हो सकती है..यह तस्वीर देखी गयी है कटिहार में ..

वो गरीबी इतनी बड़ी बोझ बन सकती है कि ..नौ माह तक गर्भ में पलने वाले बच्चे को एक मां गैरो के भरोसे छोड़ चली जाए..?क्या उसे नवजात की एक किलकारी ने पीछे मुड़कर.. सीने से लगाने को नहीं कहा होगा…?

सवाल तो सौ खड़े है …क्योंकि मामला ही कुछ ऐसा है.. कटिहार के फलका बरेटा में जो कुछ हुआ.. उसकी चर्चा आज चारों तरफ है..गरीबी के साये तले एक महिला ने प्रसव के बाद अपने मासूम को सीएचसी में ही छोड़ दिया और घर पहुंचकर दो मासूम के भोजन की जुगाड़ में जुट पड़ी..एक मां ने जो कुछ कहा-उसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे…  पति छोड़कर पंजाब चला गया ..सरकारी जमीन पर रहकर.. दो बच्चो की परवरिश के लिए खुद से मजदूरी कर ..गुजर बसर करते है ..किसी तरह मैं अपना दो बच्चो और गर्भ में पल रहे बच्चे का लालन-पालन कर रही थी.. लेकिन अब ऐसा मुनासिब नहीं है.. यही वजह है कि मैं बच्चे को छोड़कर चली आयी कि..शायद उसकी.. अब हमसे बेहतर परवरिश हो सके …

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