सहरसा सोनवर्षा राज – कोरोना संक्रमित के अंतिम संस्कार की शमशान में जगह नहीं मिलने पर शव को परिजनों ने घर के पिछवाड़े किया दफन।

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गोंदराम में कोरोना संक्रमित के अंतिम संस्कार की शमशान में जगह नहीं मिलने पर शव को परिजनों ने घर के पिछवाड़े किया दफन।
मृतक की 7 वर्षिय बहन ने दिया मुखाग्नि।
मौत के तिसरे दिन भी परिजनों का नहीं किया गया रैंडम जांच।

सोनवर्षा राज ( सहरसा ) कोरोना ने सगे रिश्तों के साथ साथ समाजिक अलगाव बढ़ा दिया है।संक्रमण के डर से रिश्ते इतने बदल गए हैं कि संक्रमित के मौत की जानकारी के बावजूद पत्नी उसे देखने तक नही पहुँची तथा समाज के लोगों ने भी पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार तक में अकेला छोड़ दिया। मृतक के अंतिम संस्कार में प्रशासन व ग्रामीणों द्वारा मदद नहीं किए जाने से आखिरकार घर के पिछवाड़े में ही शव को दफनाना पड़ा।जबकि मदद के लिए मृतक के पिता ने प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक का दरवाजा खटखटाया।हालांकि पीएचसी प्रशासन द्वारा मृतक के घर पहुंच कर परिजनों को अदद पीपीई किट उपलब्ध करवाया था।
मामला बसनही थाना क्षेत्र स्थित रघुनाथपुर पंचायत के वार्ड संख्या-04 का है।जहाँ स्थानीय नीवासी कैलाश कामत का 25वर्षीय पुत्र अमरीश कामत की मौत बीते शनिवार की रात कोरोना संक्रमण से हो गई थी।


बीते शूक्रवार को उसकी तबियत अचानक ज्यादा खराब होने पर इलाज के लिए उसे स्थानीय पीएचसी ले जाया गया जहां जाँच के बाद उसे कोरोना पाँजिटिव बताते हुए सहर्षा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।लेकिन पीएचसी प्रबंधन द्वारा एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई और ना ही कोई निजी वाहन ही पाँजिटिव मरीज को सहरसा ले जाने को तैयार हुआ।आखिरकार थक हार कर उसे पुनः घर ही ले जाना पड़ा। शनिवार की शाम करीब आठ बजे घर में ही अमरिश कामत की मौत हो गई।
परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ा जद्दोजहद
शनिवार की रात अमरिश की मौत के बाद रविवार की सुबह परिजनों द्वारा इसकी सूचना प्रखण्ड प्रशासन को जानकरी भी दी गई। घण्टों इंतजार के बाद प्रखंड प्रशासन के दखल देने पर पीएचसी प्रशासन द्वारा दो पीपीई किट सौंपा गया।स्थिति ये हो गई कि मृतक का शव घर में पड़ा हुआ था लेकिन कोई उठाने वाला भी नही था।तब जाकर सगे-सम्बन्धियों को इसकी जानकारी दी गई तो वो लोग घर पहुँचकर अर्थी को कंधा दिया लेकिन श्मशानघाट के अभाव में अंतिम संस्कार करने के लिए दो गज जमीन तक नही मिल सका।मृतक के पिता कैलाश कामत ने ये भी बताया कि शुरू से अपने दादा,परदादा को जिस जमीन पर अंतिम संस्कार करते आये वहां ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार के लिए गड्ढा खोदने के लिए मना कर दिया ।आखिरकार अपने बेटे के शव को अपने ही घर के पिछवाड़े में गड्ढा खोद कर दफनाना पड़ा । लाचार पिता ने अपना रो रोकर कहा कि उन्हें ये मलाल है कि हिन्दू रितिरिवाज के तहत वो अपने पुत्र का अंतिम संस्कार भी नहीं कर सके। बताते चले की मृतक तीन भाई और तीन बहन थे जिसमें मृतक ही सबसे बड़ा था और जब उनकी मौत हुई तो दोनों छोटा भाई घर से बाहर था तीन बहन में दो की शादीशुदा है।

ऐसे में छोटी बहन 7वर्षीय राधा कुमारी द्वारा मुख़ा अग्नि देकर उसे दफनाया गया।

गांव के किसी टेम्पू वाले को 700रुपया भाड़ा पर ले गया था पुत्र को सोनवर्षाराज पीएचसी।

मृतक के परजिन ने बताया कि लॉकडाउन के चलते कोई भी निजी वाहन जाने को नही हुआ तैयार तो गांव के ही एक टेम्पू वाले को लेकर गोदराम अपने घर से सोनबर्षा पीएचसी किसी तरह ले गया। लेकिन जब वहां कोरोना पॉजेटिव होने की खबर मिली और सोनवर्षा पीएचसी से सदर अस्पताल सहर्षा ले जाने को कहा पर कोई भी एबुलेंस सोनवर्षा पीएचसी प्रबंधन से मुहैया नही करवाया गया।जिसके बाद साथ ले गए गांव के टेम्पू वाले को कहा कि सहर्षा सदर ले चलो तो उसने बोला की हम नही जॉएंगे सड़क पर लॉकडाउन होने की वजह से गाड़ी पुलिस पकड़ लेगी आपको वापस घर चलना है तो चलो तो आखिरकार लाचार होकर वापस उसी टेम्पू से अपने बीमार पुत्र को लेकर घर वापस आ गया।

कटिहार जिले के बारसोई में हुई थी मृतक की शादी।

मृतक के पिता ने बताया कि अपने बेटे की शादी कटिहार जिला के बारसोई में ललन कामत की पुत्री खुश्बू देवी से आज से 10साल पूर्व किया था लेकिन दो ढाई साल ही मेरे बेटे के पास रही उसके बाद उसकी मां नही थी तो वो अपने मायके में रहने लगी।5साल का बेटा भी है अपने मां के साथ ही रहता है।लेकिन जब अपने बेटे की मृत्यु खबर दिया तो आने से इंकार कर दी।

मृतक के पिता कैलाश कामत भी कुछ दिन पहले सिंचाई विभाग में कटीहार जिला के लावा में ही प्यून का काम करते थे लेकिन किसी कारण वस सात-आठ साल पूर्व ही नोकरी छूट गई।

सरकारी आंकड़ों में मृतक के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि के बावजूद सोमवार तक मृतक के परिजनों का रेंडम जाँच नही किया जाना पीएचसी प्रबंधन की लापरवाही ही तो है।

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